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Saturday, January 7, 2017

'You Start Dying Slowly' in Hindi

*नोबेल पुरस्कार विजेता स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा की कविता  "You  Start  Dying  Slowly" का हिन्दी अनुवाद ...*_
_*1~ आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :*_
    _- करते नहीं कोई यात्रा,_
    _-
पढ़ते नहीं कोई किताब,_
    _-
सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,_
    _-
करते नहीं किसी की तारीफ़ ।_
_*2~ आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, जब आप :*_
    _- मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,_
    _-
नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की ।_
_*3~ आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :*_
    _- बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के,_
    _-
चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,_
    _-
नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार,_
    _-
नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग, या_
    _-
आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान।_
_*4~ आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :*_
    _- नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को, और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को, वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें, और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।_
_*5~ आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :*_
    _- नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को, जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,_
    _-
अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,_
    _-
अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,_
    _-
अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार, किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की ।_

_*"तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं !"*_

Tuesday, November 22, 2016

अनहद की मधुशाला

!! अनहद की मधुशाला!!
  --------------- बसीर अहमद मयूख
जाने कैसी मय पी आया
अनहद की मधुशाला जाकर
तेरा मेरा भेद भुलाया
मनुआ मेरा मस्त कलन्दर
सांसे जाप जपा करती हैं
अल्ला हू अकबर, हर हर हर हर !
मदिरा मोह जगाती लेकिन
इस हाला का हाल निराला
एक बूंद पी लगता जैसे
चेतनता का घट पी डाला
इसको पी कर औघड़ जोगी
गोरख बोला जाग मछन्दर!!

Thursday, March 3, 2016

राजनीति की पाठमाला

!!राजनीति की खल पाठमाला!!
क से कलम को झूठा लिख
ख से खल अनूठा लिख
ग से गंवर लड़ाई लड़
घ घमंड के रथ पे चढ़
अंहकार है अहं की बिन्दी
लिख बेटा तू अपनी हिन्दी !

Sunday, November 8, 2015

दीप कामना

दीप कामना

आगे बढ़कर सबसे मिलकर
दीप जलायें जन के पथ पर,
छायामय हो मार्ग हमारा
हम हों विश्वबोध के रथ पर।

नवयुग का आनंद उठायें
दीन हीन को भूल न जायें
हटे अंधेरा जग से मन से
सब मिलकर ही दीप जलायें।

विश्वग्राम में सुख की धारा
नित्य नई चीजों में संचित,
मानव का धन केवल मानव
सच से कभी न हों हम वंचित।

दीप उठाये लघुतम कर हो
भावी का पथ आलोकित हो
लिए आत्मा करुणा का धन
सबके हित पर ही मोहित हो
---------------------------------------------Sanjeev