चेतना, नियति और स्वतंत्रता की संरचना
1. उत्पत्ति का प्रश्न : चेतना या पदार्थ?
मानव चिंतन के सबसे प्राचीन प्रश्नों में से एक आज भी हमारे सामने उतनी ही गहराई के साथ उपस्थित है—
चेतना पदार्थ से उत्पन्न हुई, अथवा पदार्थ चेतना के भीतर प्रकट हुआ?
भौतिकवादी दृष्टिकोण सामान्यतः चेतना को पदार्थ का एक उद्भूत गुण (emergent property) मानता है। इस दृष्टि से देखें तो मूलभूत प्राकृतिक नियमों के अधीन संचालित भौतिक प्रक्रियाएँ क्रमशः अधिक जटिल संरचनाओं को जन्म देती गईं। इन जटिल संरचनाओं से अंततः जैविक जीवों का विकास हुआ और उन्हीं के साथ व्यक्तिपरक चेतना का भी उदय हुआ।
जैविक प्रणालियों के क्रमिक विकास की व्याख्या के रूप में यह दृष्टिकोण वैज्ञानिक रूप से स्वीकार्य हो सकता है। किंतु इसके पीछे एक और अधिक गहरा प्रश्न छिपा हुआ है—